उत्तराखंड सरकार ने मंजूर किया Nurse Practitioner Midwifery कार्यक्रम | मातृ और शिशु स्वास्थ्य में सुधार
देहरादून, अगस्त 2025: उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को और मज़बूत बनाने के लिए नर्स प्रैक्टिशनर मिडवाइफरी (NPM) कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य है कि गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशुओं को शुरुआती दिनों में विशेष देखभाल मिल सके।
क्यों ज़रूरी है यह कार्यक्रम?
उत्तराखंड के कई गाँव और दूरदराज़ के इलाकों में अभी भी पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं पहुँच पातीं। इस कारण मातृ मृत्यु दर और नवजात शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) राज्य में चिंता का विषय बनी रहती है।
मिडवाइफरी कार्यक्रम से प्रशिक्षित “मिडवाइव्स” नियुक्त होंगी, जो गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल घर-घर जाकर करेंगी।
किन्हें मिलेगा लाभ?
- गर्भवती महिलाएँ – गर्भावस्था के दौरान नियमित चेक-अप, पोषण और सुरक्षित प्रसव की सुविधा।
- नवजात शिशु – जन्म के बाद शुरुआती दिनों में विशेष देखभाल और स्वास्थ्य निगरानी।
- ग्रामीण और पहाड़ी परिवार – जहाँ अभी अस्पताल या डॉक्टर तक पहुँच मुश्किल है।
प्रक्रिया कैसे होगी?
- प्रशिक्षण: नर्सिंग और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर “मिडवाइव्स” बनाया जाएगा।
- सेवाएँ: ये मिडवाइव्स गाँव-गाँव जाकर गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन करेंगी, नियमित विज़िट करेंगी और सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करेंगी।
- संपर्क: महिलाएँ अपने नज़दीकी आशा कार्यकर्ता, ANM (Auxiliary Nurse Midwife) या ब्लॉक स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर इस सुविधा के लिए नाम दर्ज करवा सकती हैं।
- खर्च: यह सुविधा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत उपलब्ध होगी, यानी लाभार्थियों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
सरकार की उम्मीद
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस कार्यक्रम से:
- शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आएगी,
- माताओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा,
- और दूरदराज़ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ेगी।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में नर्स प्रैक्टिशनर मिडवाइफरी कार्यक्रम मातृ और शिशु स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी पहल साबित हो सकता है। अब गाँव की महिलाओं को भी अस्पताल जैसी सुविधा उनके घर के पास ही मिल सकेगी।